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Definitional Dictionary of Agricultural Entomology (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Labellum

ओष्‍ठक, लेबेलम
डिप्टेरा की शुंडिका के दूरस्थ सिरे पर उपस्थित गद्दियों अथवा मुख – पालि की जोड़ी में से एक पर कूटवातक (pseudotracheae) होते हैं जिनके द्वारा भोजन निकलकर मुख – छिद्र में जाता है ।

Labial palp

अधरोष्‍ठ स्पर्शक
कीट के एक जोड़ी खंडीय संवेदी अंग या अधरोष्‍ठ पर स्थित संस्पर्शक (feeder) ।

Labium

अधरोष्‍ठ, लेबियम
कीट – शीर्ष का पश्‍च – मध्य – उपांग जो द्वितीय जंभिकाओं के मिलने से बनता है ।

Labrum

ऊर्ध्वोष्‍ठ, लैब्रम
फ्रॉन्स से निकलने वाली मांसपेशियों के साथ, मुखपालि से निलम्बित शिर का मुखपूर्व भाग ।

Lac

लाख, लाक्षा
लाख कीट, केरिया लाक्का और संबंद्ध जातियों (लैक्कीफेरिडी : होमोप्टेरा) द्वारा स्रावित राल ।

Lacerate

दीर्ण
कीट द्वारा पर्णशीर्ष के किनारों पर बनाए गए अनियमित गहरे कटाव।

Lacinia

लैसीनिया
जंभिका की आंतरिक एन्डाइट पालि जिसमें स्टाइपीज से निकलने वाली एक पेशी और कभी – कभी कपाल – भित्ति से निकलने वाली दूसरी पेशी लगी होती है ।

Lancet

लेन्सेट
कीटों का प्रथम प्रकठक जो बल्ब ओर शूकिका के निचले सीमातों पर सरकता है ।

Lapping mouth parts

लेहन मुखांग
मधुमक्खी का मुखांग जिसमें लम्बा, जंभिका – ओष्‍ठीय काम्पलेक्स होता है तथा जिह्विका आकुंचन एवं अपाकुंचन में समर्थ होती है ।

Larva

लारवा, डिम्भ, डिम्भक
पूर्ण रुपांतरणीय अप्रौढ़ अवस्था का स्वतंत्र कीट, जो संरचना तथा स्वभाव में वयस्कों से भिन्न होता है (जैसे – इल्लियां, अपादक और भृंगक आदि) ।

Larvarium

डिम्भशाला
कीट डिम्भक द्वारा बनाया गया नीड़ अथवा आश्रय – स्थल जो कभी – कभी एक रेशमी झूले अथवा नलिका के समान हो सकता है । यह पत्तियों के टुकड़ों, चीड़ की पतली पत्तियों, मृदा – कणों आदि को आपस में बुनकर बनाया जाता है ।

Larvicide

डिम्भकनाशी
ऐसा कीटनाशी रसायन जो डिम्भकों को मारने के लिए काम में लाया जाता है ।

Lateral oviduct

पार्श्‍वीय अंडवाहिका
अंडाशय से संबद्ध और मध्यजन स्तर से उत्पन्न मादा तंत्र की युग्मित पार्श्‍व वाहिनियों में से एक । कभी – कभी मध्य वाहिनी की बाह्यचर्म शाखा अंशत: या पूर्णत: इसकी जगह ले लेती है ।

Laterotergite

पार्श्‍वपृष्‍ठकांश
पृष्‍ठ का पार्श्‍व दृढ़ीकरण जो मुख्य मध्य पृष्‍ठकांश से भिन्न होता है ।

LC 50 (lethal concentration 50)

एल. सी. 50 (घातक सांद्रण 50)
धूल, कुहासा, गैस या वाष्प के रुप में वायु में उपस्थित यौगिक की आविषालुता को अभिव्यक्त करने का तरीका । धूल तथा कुहासे में यह सामान्यतया माइक्रोग्राम प्रति लीटर और गैस तथा वाष्प में पी. पी. एम. में व्यक्त किया जाता है । एल. सी. 50, मात्रा निर्धारण का सांख्यिकीय आकलन है जो परीक्षण – जाति की बहुत बड़ी समष्‍टि के 50 प्रतिशत को मारने के लिए आवश्यक है । इस सांद्रण से उपचारित प्राणियों में 50 प्रतिशत की मृत्यु हो जाने की आशा की जाती है ।

LD 50 (lethal dose 50)

एल. डी. 50 (घातक मात्रा 50)
एक यौगिक की आविषालुता को व्यक्त करने की सामान्य पद्धति । यह प्राय: परीक्षण – प्राणी के शरीर – भार के प्रति किलोग्राम रसायन के मिलीग्राम के रुप में व्यक्त की जाती है (मि.ग्रा. / कि.ग्रा. / शरीर भार)। एल. डी. 50, मात्रा निर्धारण का सांख्यिकीय आकलन है जो परीक्षण – जाति की बहुत बड़ी समष्‍टि के 50 प्रतिशत को मारने के लिए आवश्यक है (अर्थात् जलीय घोल की एक ही मुखीय मात्रा) या कानून द्वारा वह मात्रा जिसके द्वारा इस प्रकार से उपचारित परीक्षण – प्राणियों के 50 प्रतिशत की 14 दिन के अंदर मृत्यु होजानेकी आशा की जा सकती है । यदि एक यौगिक में एल. डी. 50 शरीर भार 100 मि.ग्रा./ कि.ग्रा. है, तो यह मि.ग्रा. / कि.ग्रा. वाले एल. डी. 50 की अपेक्षा अधिक आविषालु है ।

Leaf hopper

पर्ण फुदका
होमोप्टेरा – गण के पादप चूषक कीट जो सिकेडिलिडी अथवा जैसिडी कुल के अंतर्गत आते हैं । ये छोटे पर लम्बे फुदकने वाले कीट पादपों में अनेक विषाणु और कवक रोग फैलाते हैं ।

Leaf miners

पर्ण सुरंगक
ऐसे कीट जो अधिचर्म स्तरों के बीच सुरंग बना लेते हैं । उदाहरण – धब्बेदार पर्ण – सुरंगक, सर्पिल – पर्ण – सुरंगक ।

Leaf roller

पर्ण लपेटक
वे कीट जिनके डिम्भक पत्तियों को आपस में लपेटकर नीड़ बनाते हैं ।

Lepidoptera

लेपिडॉप्टेरा (शल्कपंखी गण)
दो जोड़ी झिल्लीमय पंख वाले कीट जिनके पंखों में अनुप्रस्थ शिराएं बहुत कम होती हैं । शरीर, पंख और उपांग चौड़े शल्कों (scales) से ढके हुए; चिबुक अवशेषी या अनुपस्थित और प्राय: जंभिकाओं (maxillae) से बनी चूषक शुंडिका (proboscis) द्वारा निरुपित होते हैं । डिम्भक क्रॉसरुपी, प्राय: आठ जोड़ी टांगों वाला, कोशित आमतौर पर लगभग अबद्ध और सामान्यत: कोया (cocoon) या मृद – कोशिका (earthen cell) में बंद, पंख में पूर्ण वातकन्यास (tracheation) उदाहरण – तितलियां और शलभ (मॉथ) ।
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